एक हाथ में त्रिशूल कठोर, दूजे हाथ वरदान की सरिता; सर में जिसके चन्द्रमा साजे, और गले में काल भुजंगा; कंठ में जिसके प्रचंड गरल, और जटा में अमृत गंगा ; मुस्कान जिसकी सृष्टि की रचना, और क्रोध प्रलय बाण है; वो आदि-अनंत, वो आशुतोष , वो अखिलेश्वर,वो शिव शंकर है;
जय श्री महाकाल 🙏
जवाब देंहटाएंJAI MAHADEV
जवाब देंहटाएंबम-बम भोले बम, नमामि शंकर।
जवाब देंहटाएं🕉 नमः शिवाय।
नीलकंठे प्रचंड गरलः यस्य सः शंकरः ।।
बहुत खूब, छा गए मोहित ।
Thank you mannu
हटाएंHar har mahadev......bam bam bhole......
जवाब देंहटाएंनमामि शंकर।
हटाएंसत्यम शिवम् सुन्दरम्
जवाब देंहटाएंJAI MAHAKAL
हटाएंKya baat ,kya baat.
जवाब देंहटाएंthanks bhai
हटाएं